Nov 18, 2018 · कविता

माँ

माँ की तिल तिल कर
जलती बुझती आंखों में है
उजाले की रेख
तमस में पगडंडी दिखाती …
माँ की दबी सी मुस्कुराहट में है
एक मरती हुई धूप
कान उमेठ कर अभी कह देगी
बड़ा शैतान है रे तू ….

“ निनाद ”
(डॉ एम एल गुप्ता , उदयपुर)

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