माँ

माँ अगर तू ना होती तो मेरा क्या होता ,
पाल पोस कर तूने मुझे बड़ा किया ,
जब गिरने लगा तो तूने मुझे खड़ा किया,
हाथ पकड़ कर तूने मुझे चलना सिखाया ,
इस दुनिया से तूने मुझे लड़ना सिखाया ,
माँ अगर तू ना होती तो मेरा क्या होता /
गलती करने पर गुस्से से डांटना ,
गुस्सा होने पर चुपके से पुकारना ,
और फिर मेरे सर पर अपना स्नेह भरा हाथ फेरना ,
आज भी बहोत याद आता है ,
माँ अगर तू ना होती तो मेरा क्या होता /
इस दुनिया का तूने मुझे कठोर सच सिखाया ,
फिर भी नफरत नही सभी से प्यार करना सिखाया,
हर मुश्किल से लड़ना सिखाया ,
कभी भटका तो सही राह दिखाया ,
माँ अगर तू ना होती तो मेरा क्या होता /
बीमार मैं होता था ,रात भर तू ना सोती थी,
परेशान मैं होता था ,नाजाने तू क्यों रोती थी ,
हर दुःख हर दर्द में साथ मेरे तू होती थी ,
माँ अगर तू ना होती तो मेरा क्या होता /
जशनप्रीत सिंह
धनबाद (झारखण्ड)

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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