Nov 15, 2018 · कविता
Reading time: 1 minute

माँ

भोलेपन की सूरत,पर माँ पिघल जाती है।
श्रृंगार स्वरूप सब भूल कर,लोरी में घुल जाती है।।
कोई बता दे उसकी ममता,की कैसी ये चादर ।
उठ-उठ कर आती माँ मेरी,ऐसा ममता का आँचल ।।

भीगे तन में बैठी,माँ ऐसी तेरी पूजा ।
उठ ना जाये निंदिया,तुझसा ना कोई दूजा ।।
कितना पराया तुमको कर दें,या हो हम दुःख में शामिल ।
उठ-उठ कर आती माँ मेरी, ऐसा ममता का आँचल ।।

बान्धी हें प्रेम की डोरी,अँगना में जो मेरी।
सरल हो रहा जीवन,जब से सुन ली लोरी।।
जब-जब बिगड़े शब्द मेरे,या हो गया मैं विरहन।
उठ-उठ कर आती माँ मेरी ऐसा ममता का आँचल।।

लेखक प्रकाश चंद्र जुयाल
गैरसैण चमोली (उत्तराखंड)

Votes received: 25
10 Likes · 45 Comments · 275 Views
Copy link to share
Prakash chandra juyal
2 Posts · 292 Views
Prakash chandra juyal Father name- laxmi prasad juyal Mother name- vimla devi Address village pajyana... View full profile
You may also like: