Nov 14, 2018 · कविता
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माँ

माँ के मुँह से निकली दुआयें आसमान तक पहुँची,
वही दुआयें शायरी बनकर मेरी ज़बान तक पहुँची।
मेरी ख़ुशी का ठिकाना मत पूछिये फिर ,
ख़ुदा की रहमतें जब मेरे मकान तक पहुँची।

___ अब्दुल मोईद सफ़ीपुरी

पता- सफ़ीपुर (उन्नाव) उत्तर प्रदेश

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