माँ

हमारी आंखों के अश्रुओं को अपनी आंखों में समां लेती है माँ
अपनी हर एक मुस्कान को हम बच्चो पर लुटा देती है माँ,

जब भी हमे कोई तकलीफ हो तो सारी खुशियां न्योछावर कर देती है माँ
जब भी हमे ठोकर लगे बार बार याद आती है माँ,

धूप भरी भागदौड़ में अपने अंचल में शीतल छाया देती है माँ
खुद चाहे कितनी भी थकी हो हमे देखकर अपनी थकान मिटा लेती है माँ,

बच्चे कैसे भी हो हर मोड़ पर उनकी रक्षा करती है माँ
बचपन से ही आदर्शों की पालना करना सिखाती है माँ,

अपने शब्दों में बयां नही कर सकता ऐसी होती है माँ
भगवान का साक्षात मार्गदर्शित रूप होती है माँ।।

निशान्त गुप्ता
नगर(भरतपुर)राजस्थान

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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