"माँ"

नन्हे से बच्चे की वो जाँ होती है,
आखिर माँ तो ईक माँ होती है।
भूख,प्यास, संकट के समय,
कड़ी धूप में, वो छाँ होती है।
आखिर माँ तो ईक माँ होती है।।
मां धरती है,आकाश है, पानी है,
अन्धेरे में उजियारे की राह होती है।
आखिर माँ तो ईक माँ होती है।।
क्या लिखूं माँ पे जब शब्द नहीं है,
मन्दिर से भी पवित्र जहाँ होती है।
आखिर माँ तो ईक माँ होती है।।

@बलकार सिंह हरियाणवी
गोरखपुर, फतेहाबाद, हरियाणा।

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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