माँ

कैसे लिखूँ मैं कविता तुझ पर ,
माँ तू खुद में एक उपन्यास है ।
1.निर्झर नदिया सी बहती रहती ,
मुख से न कभी कुछ अपनी कहती ।
आँखों मे तेरी मेरा संसार है ।।
2.माँ जीवन का सुनहरा राग है ,
बोली तेरी जैसे मनभावन साज है ।
बिन माँ के जीवन सिर्फ एक त्रास है ।।
3.माँ प्यार भी है, मार भी ,
माँ क्रोध भी है ,दुलार भी ।
माँ जीवन का मधुरतम अहसास है ।।
4.आँचल तेरा स्वर्ग की राह दिखाता है ,
स्नेह तेरा जीवन सफल बनाता है ।
जिंदगी सिर्फ तेरा आगाज है ।
5.रचना हम ,रचियता तुम ,
प्यास हम, सागर तुम ।
माँ तुझसे ही मेरा संसार है ।।
6.माँ मुझ पर एक अहसान कर देना
रोती हैं जब आँखें मेरी ,
सपनों में ही दुलार कर लेना ….
वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़

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