कविता · Reading time: 1 minute

माँ !

माँ ममता की अनंत सागर है ,
ह्रदय -भाव की गहरी अनुभूति ;;
वात्सल्य की पराकाष्ठा ,
करुणा की प्रतिमूर्ति है माँ !

हमारे सुख- दुःख की धूप-छाँव,
अपरिमित विश्वास है माँ !
माँ है तो सबके पूरे अरमान हैं ।
जीवन की संपूर्णता है ,
संस्कार है, प्रेरणा है,
अदम्य साहस की स्रोत है,माँ!

क्या कहूँ …..!
क्या- क्या है हमारे लिए माँ!
माँ से हमारा अस्तित्व है,
विकास है, स्वरुप है ।
माँ है तो जीवन में, खुशियों की धूप है ।
धरती पर ईश्वर की ,
साक्षात् रूप है माँ!
माँ तो बस! माँ है ।

स्वरचित (मौलिक)
माधवी उपाध्याय
जमशेदपुर ,झारखंड

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