माँ

माँ जैसा नही कोई दूसरा जग में,
माँ बनने पर ही समझ ये आती।
नौ महीने खून गर्भ में पिलाया,
स्वस्थ बच्चा हो हर परहेज करती।
पैदा होने पर खशियाँ ही खुशियाँ,
पीड़ा को भुला शिशु को निहारती।
बच्चे का जीवन बनाने में ही लगी,
जिंदगी बिना थके सफल हो जाती।
सफल हो जाये बच्चे बस सपना,
देख दिनरात ईश्वर से दुआ मांगती।
इस माँ का दिल न दुखाना कभी,
माँ के बिना जीवन बेकार है खाली।

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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