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माँ

Nov 7, 2018 02:28 PM

माँ
माँ तू ममता का विशाल व्योम।
तू ही तो हो माँ ममता की सहस्त्ररश्मि।
तुझसे ही शोभायमान है माँ ये भूतल।
माँ तू करुणा की निर्झरी।
कष्ट निवारिणी स्नेह सुरसरि।।
माँ तू अनुराग की छाया।
तुझसे ही निर्मित मेरी काया।।
माँ तू ही तो मेरी पथ प्रदर्शिका।
विधाता की कृपारुपी पंजिका।।
माँ तू मेरी कल्पना का सागर।
तू ही तो हो माँ अमृत का गागर।।
माँ तू ही तो है ज्ञान प्रदाता।
माँ तू विधाता की भक्ति ।
तू ही तो हो माँ मेरी पापमोचिनी शक्ति।।
तू माँ विधाता का मनुज को सुन्दर वरदान।
धन्य है तू माँ और तेरा महाबलिदान।।
माँ तू मुझ निर्बल का बल।
ममतारुपी विकसित पुष्पदल
भारत भूषण पाठक
ग्राम+पो.-धौनी (शुम्भेश्वरनाथ)

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Bharat Bhushan Pathak
Bharat Bhushan Pathak
DUMKA
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