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माँ

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

मुक्तक

February 10, 2017

श्वास से श्वासा मिली,चुंबन मिला,आनंद था|
मातृमय हर रूप में, शिशु-ध्यान परमानंद था |
छिन गया शुभ मातु- साया,तभी से मैं दीन बन
रोया-देखा माँ-हृदय में प्रेम-सु मकरंद था|

इसी से माँ ज्ञान का साया व्यवस्था बन गया|
मातु-तज, माँ-विचारों से गहन रिश्ता बन गया|
जगत् की इस भीड़ में माँ के सिवा सब मौन हैं|
इसलिए ही, उर पिघल कर, मातु- किस्सा बन गया|

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

उर=हृदय

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Author
बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर,... Read more

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