माँ

माँ

कविता

आपके ही भीतर मेरी प्यारी माँ,
धड़का पहला धड़कन मेरा।
पहला मुख दिखा आपका जब,
पहली बार खुला नयन मेरा।।
मेरे संग तुतलाकर सिखाया
बोलना बोल ये सुंदर मुझको
शिववीर पला बढ़ा धीरे – धीरे –
ममता की छाँव में बचपन मेरा।

श्वेत सी जिन्दगी में आपने मेरी,
भर दी स्नेह की रंगीन रंगोली।
सदा छाँव में मुझे अपने रखा,
मेरे सिर पे रखी अपनी चोली।।
नजर किसी की न लगे मुझको,
उतार आरती जल ढलकाती-
बार- बार बलि-बलि जाती आप,
लगाकर शिववीर माथे रोली।।

आपसे ही सांसे है, जीवन है अभिराम।
श्रीचरणों में आपके, शिववीर का प्रणाम।।

★★

– प्रणव भास्कर तिवारी शिववीर
– पूरे ब्राह्मण, महुलारा
– राम सनेही घाट, बाराबंकी
– उत्तर प्रदेश

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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