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माँ

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

मुक्तक

February 9, 2017

माँ का जीवन, मातृ-वाणी , मातु की आवाज है |
रोम पुलकित, मात की भाषा का उर पर राजहै|
इस तरह से तेरा जाना , रक्त कुछ कम कर गया |
भेद नहिं कुछ, विचारों में आपकाअवतार है|

जब तलक माँ विचारों में,तभी तक यह ज्ञान है|
मानव सुहित की प्रार्थना और शुभ मुस्कान है |
गई जननी, सब गया, मैं ना रहूँ, क्या भेद है ?
आप बिन, यह मनुज जीवन, मात्र भ्रम-जग-चाम है|

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

भेद=अंतर

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Author
बृजेश कुमार नायक
कोंच,जिला-जालौन (उ प्र) के बृजेश कुमार नायक साहित्य की लगभग सभी विधाओं के रचनाकार हैं |08मई 1961को ग्राम-कैथेरी(जालौन,उ प्र)में जन्में रचनाकार बृजेश कुमार नायक की दो कृतियाँ "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" प्रकाशित हो चुकी है |पूर्व राज्य... Read more
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