माँ

हमारी जिंदगी की शुरुवात
माँ के गोद से होती है
हम जो रोते है
तो दर्द माँ को भी होती है
देखी जो थोड़ी सी बेचैनी
तो ममता फफक पड़ती है
कोई शक नही इसमें
माँ तो ममता की मूरत होती है

नौ महीने रहते हम कोख में
साल भर रहते जिसकी गोद में
एक एक कदम जिसने
हमको चलना सिखाया
टूटे हुए शब्दों को
जिसने हमे जोड़ना सिखाया
प्यार भरे हाथो से हमे
जिसने दुलार के खिलाया है
उसकी ममता ने ही
उसे माँ कहलवाया है

लेखक
धनराज खत्री

शपथ पत्र

यह मेरी स्वरचित एवं मौलिक रचना है जिसको प्रकाशित करने का कॉपीराइट मेरे पास है और मैं स्वेच्छा से इस रचना को साहित्यपीडिया की इस प्रतियोगिता में सम्मलित कर रहा/रही हूँ।
मैं साहित्यपीडिया को अपने संग्रह में इसे प्रकाशित करने का अधिकार प्रदान करता/करती हूँ|
मैं इस प्रतियोगिता के सभी नियम एवं शर्तों से पूरी तरह सहमत हूँ। अगर मेरे द्वारा किसी नियम का उल्लंघन होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सिर्फ मेरी होगी।
साहित्यपीडिया के काव्य संग्रह में अपनी इस रचना के प्रकाशन के लिए मैं साहित्यपीडिया से किसी भी तरह के मानदेय या भेंट की पुस्तक प्रति का/की अधिकारी नहीं हूँ और न ही मैं इस प्रकार का कोई दावा करूँगा/करुँगी|
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मैं समझता/समझती हूँ कि अगर मेरी रचना साहित्यपीडिया के नियमों के अनुसार नहीं हुई तो उसे इस प्रतियोगिता एवं काव्य संग्रह में शामिल नहीं किया जायेगा; रचना के प्रकाशन को लेकर साहित्यपीडिया टीम का निर्णय ही अंतिम होगा और मुझे वह निर्णय स्वीकार होगा|

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