कविता · Reading time: 1 minute

माँ

मां शब्द नहीं एक एहसास है। जो दूर रह कर भी पास है।
यूं तो जमाने मे हर कोई पास है।
पर वो सबसे प्यारा एहसास है।
मां शब्द नही एक एहसास है।
विना शर्त करती अरदास है।
मां एक अमिट मधुमास है।
मां शब्द नही एक एहसास है।
मां तेरे जीवन का पहला गुरु है।
उसके सबक से जीवन शुरु है।
मां के विना जीवन वेहाल है।
मां शब्द नही एक एहसास है।

स्वरचितसौदामिनी खरेरायसेन म0प्र0 “दामिनी”

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