माँ

माँ

शब्द नहीं, संसार है माँ
खुद में ही त्यौहार है माँ ।

हो अमीर या गरीब की
एक पवित्र प्यार है माँ ।

दुख-सुख फिक्र,सब्र
रात-दिन इन्तजार है माँ

गुस्सा,झिड़क,चिंता,खुशी
लाड और पुचकार है माँ

अच्छा,बुरा,पसन्द,नापसंद
बच्चों की जानकार हैं माँ ।

लोरी,थपकि,मान ,मनौवल
डांट और फटकार है माँ ।

घर में सब अभिनय है करते
सबसे अहम किरदार है माँ ।
-अजय प्रसाद
📲9006233052
टी जी टी इंगलिश
डी ए वी स्कूल पावर ग्रिड कैम्पस
बिहारशरीफ,नालंदा,बिहार 803216

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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