माँ

माँ

एक शब्द नही पूरा परिवार है ,
माँ सिर्फ माँ नही दैवीय अवतार है ।

माँ वो है जिससे पूरा संसार है
माँ बेटे का भविष्य और बेटी का संस्कार है ।।

माँ तेरा मेरा नही करती जो व्यापार है
माँ सबको देती है बराबर जो जिसका अधिकार है ।।

माँ जीवन का एक दर्पण है
जिसमे दिखता आपका आकार है ।।

माँ अभिलाषा है इच्छा है ऊंचाई है
माँ जीवन मे बनाया हुआ पूरा घर बार है ।।

माँ तो बस माँ होती है जिसकी ममता ही अपार है
माँ तो बस माँ होती है जिस पर टिका सारा परिवार है ।।

VKD #दिलतोड़

विजय कुमार धनखड़
नजफगढ़ नई दिल्ली

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

Voting is over for this competition.

Votes received: 108

Like 10 Comment 55
Views 687

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing