Nov 3, 2018 · कविता

माँ !!!

🙏🏻 माँ ~~

माँ ईश्वर का दूसरा अलौकिक रूप होती है
माँ से ही मिलती काया औ,जीवन ज्योति है

माँ बच्चों के जीवन में नई भोर की उजली किरण होती है, माँ बच्चों के मन का स्वच्छ दर्पण होती है

माँ बच्चों में आत्म प्रकाश भरती है माँ बच्चों पर नेह, स्नेह, प्यार, दुलार लुटाती है

माँ बच्चे को पिता से भी नव मास अधिक जानती है
सहकर शूल सम पीडा, तन मन की व्यथा,नन्हें भ्रूण को पालती है

जब नन्हा फरिश्ता आता है आँचल में, दर्द, आसूँ, पीडा सब भूल जाती है
सोना, जागना, खाना, पीना भूलकर नन्हें शिशु को गले लगाती है

माँ होती है ध्रुव की माँ सुनीति जैसी जो बालमन में संकल्प डालती है
ईश्वर को समर्पित हो परमपिता की गोदी में बैठने का तप भरती है

माँ होती है अंजना जैसी जो बाल लाल अंजनीसुत को
बचपन से प्रेरित कर राम का प्यारा हनुमान बना सकती है

माँ के आचरण, व्यवहार, सोच, समझ, संस्कार ही होते हैं
जो बालक में कूट ~कूट कर ,भरकर वीर शिवाजी, राणा प्रताप बना सकते हैं

माँ के अनगिन किस्से उपकार सदियों से सुनते आये हैं
माँ के दूध के कर्ज को बडे ~बडे शूरवीर भी नहीं उतार पाये हैं

हमारे ईश्वरीय अवतार, राम, कृष्ण,आदि ने सदैव माँ के चरणारविन्द में सिर को झुकाया है
माँ के चरणों में श्रद्धापूर्वक झुककर स्वर्गसम सुख सौभाग्य को पाया है

मेरी स्वरचित रचना ~
✍ सीमा गर्ग ” मंजरी “
निवास स्थान ~ उत्तर प्रदेश, जिला मेरठ |

Voting for this competition is over.
Votes received: 63
8 Likes · 34 Comments · 441 Views
You may also like: