Nov 2, 2018 · कविता
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माँ

भोर की प्रथम किरण-सी
सघन धूप में छाँव-सी
गोधुलि में दीपक जैसी
माँ निशापथ में तारक-सी।

भाषा में स्‍वर-व्‍यंजन जैसी
गीतों में सुर ताल-सी
वीणा के मधुर सुरों-सी
माँ मुरली की तान-सी।

श्रद्धा की परिभाषा जैसी
जीवन का विश्‍वास-सी
घरा के घैर्य का प्रतिरुप
माँ सर्वज्ञ ज्ञाता-सी।

हृदय में स्‍पंदन जैसी
श्‍वास -निश्‍वास के बंधन-सी
रोम-रोम में रुधिर सरीखी
माँ परम कल्‍याणी-सी।

देवालय की मूरत जैसी
गिरजा घर की शान्‍ति-सी
पारस-सी शक्‍ति धारणी
माँ तू ही परमेश्वर है ।

दीपा जोशी
दिल्ली एन सी आर
रचना (मौलिक)

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शिक्षा-डिप्लोमा (सृजनात्मक लेखन) तथा स्नातकोत्तर डिप्लोमा (रेडियो राइटिंग) केंद्र सरकार में कार्यरत। View full profile
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