माँ

विधा — छंद (विष्णुपद छंद)
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माँ
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जीवन देने वाली माता , पुण्या होती है।
घर भर के सारे दुख अपने, सिर पर ढोती है॥

दुख सारे तन मन पर लेकर,सुख को बोती है।
देकर हमको सूखा विस्तर, गीले सोती है॥

योग्य चरित्रवान गति देकर, रहबर बनती है।
कठिनाई से लड़ना सीखा, पथ वह चुनती है॥

माँ ईश्वर का नाम दूसरा,अनुपम सी कृति है।
रूहानी अहसास सँजोती ,प्रेममयी श्रुति है॥
….अनामिका गुप्ता(अनु)
गया(बिहार)

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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