माँ

विधा — छंद (विष्णुपद छंद)
❣❣❣❣❣❣❣❣❣❣❣❣❣❣❣❣❣❣❣❣❣
माँ
❣❣❣❣❣❣❣
जीवन देने वाली माता , पुण्या होती है।
घर भर के सारे दुख अपने, सिर पर ढोती है॥

दुख सारे तन मन पर लेकर,सुख को बोती है।
देकर हमको सूखा विस्तर, गीले सोती है॥

योग्य चरित्रवान गति देकर, रहबर बनती है।
कठिनाई से लड़ना सीखा, पथ वह चुनती है॥

माँ ईश्वर का नाम दूसरा,अनुपम सी कृति है।
रूहानी अहसास सँजोती ,प्रेममयी श्रुति है॥
….अनामिका गुप्ता(अनु)
गया(बिहार)

Like 13 Comment 47
Views 421

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share