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माँ

माँ प्रेम है
माँ अर्थ है
माँ जीवन है
माँ आधार है
जिनके बिना जिंदगी निराधार है
माँ भाव है
माँ ममता है
माँ ज्ञान है
उसके आँखों में ही सारा जहान है
माँ आकार है
माँ परोपकार है
माँ उपकार है
उसके बिना ज़िन्दगी नही साकार है
माँ है तो हम है
माँ है तो क्या ग़म ही
जिनके पास नही है उनकी आँखे नम है
माँ शाम है
माँ सवेरा है
माँ विपदाओं में कड़ा पहरा है
माँ दिलों में रहने वाली याद है
माँ बच्चे की पहली संवाद है
माँ हमारे लिए फरियाद है
माँ घर की मजबूत बुनियाद है

कह रहा ‘सौरभ ‘ अपने दिल सेसबको माँ का साथ हो
कोई भी दुनिया में माँ की ममता के लिए नही अनाथ हो
रचना :-सौरभ सिन्हा
दुमका, झारखण्ड

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Saurabh kumar sinha
Saurabh kumar sinha
Dumka
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सौरभ कुमार सिन्हा शास्त्रीनगर दुमका (झारखण्ड) शिक्षा- स्नातक (समाजशास्त्र) स्नातक (पुस्तकालय विज्ञान)
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