माँ

आसमान भर अहसान कर भी कभी जताती नही ,
माँ रोती तो है मगर कभी बताती नही ।
वो सह भी ले कई तकलीफे लेकिन
ज़िन्दगी में कभी ये जताती नही ।
उनके चेहरों पे हमेशा मुस्कान बनी रहती है ।
लाख मुसीबतें आती रहे अंजान बनी रहती है ।
कर लूं मैं कई शरारतें चाहें जो भी हो ,
गलतियां कितनी भी हो जाये वो कभी गुस्सा दिखाती नही ।
वो जब भी मेरे साथ रहती है ,
फिर किसी की याद कभी आती नही ।
नींदों में भी बस उन्हीं का जिक्र होता है ,
क्या पता वो अभी क्या कर रही होगी यही फ़िक्र होता है ।
आंख आँसुओ से भर जाता है कभी कभी ,
जब वो कोई बात मुझे बताती नही ।
मेरे चेहरे की रंगत वो देखते ही पहचान लेती है ,
मैं खुश हूं या दुखी एक झटके में ही जान लेती है ।
बिना माँगे मेरी हर ख्वाहिशें पूरी कर देती है वो ,
मेरी हर खुशियों के लिए अमीर बन जाती है वो ।
खुदा ने यू ही दुनिया में भेजा नही उसे इस रूप में ,
सब की नजरों में ‘माँ’ ही कहलाती है वो ।

:-हसीब अनवर
(भोपाल,मध्यप्रदेश)

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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