वो माँ है

छोटी-छोटी बातों का रखती जो ध्यान
मोटी-मोटी बातों से रहती जो अनजान
नीचे धरती पे देखा जो इक भगवान
वो माँ है..वो माँ है..हाँ वो ही तो माँ है। वो माँ है

पलकों में रखती वो मेरी आँखों में सोती
निकले जो मेरे आँसू,मेरे नयनों से रोती
गोदी में खुशियां, आँचल दुनियां जहान
वो धरती..वो नदिया..वो ही आसमां है। वो माँ है

ममता की मूरत है या भगवान की सूरत
रहती सदा वो तत्पर,जब पड़ती जरूरत
सारी खुशियां करती अपनी जो बलिदान
वो जननी. वो दरिया. वो दया प्रतिमा है। वो माँ है

छोटे-छोटे निवालों से, ऊँचे-ऊँचे ख्यालों से
घर अंदर दीवारों से,बाहर दुनियावालों से
मुझको बचाके रखने को होती जो परेशान
वो देवी..वो करुणा…वो ही शील क्षमा है। वो मां है

काली रात अंधेरों में,शरत चंद्र उजालों में
घर-गलियारों में,मस्जिद और शिवालों में
दर-दर मांगे मन्नत, ख़ातिर अपने सन्तान
वो काली..वो दुर्गा..वो सीता.वो ही अम्मा है। वो माँ

©पंकज भूषण पाठक”प्रियम”
गिरिडीह, झारखंड

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

Voting is over for this competition.

Votes received: 54

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 8 Comment 54
Views 298

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share