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माँ....

मुझे रख कर गर्भ में तूने
खुद को बस फिर था भुला दिया
कहाँ से भेजा था रब ने तेरे पास मुझे
तेरे प्यार दुलार ने अपना बना लिया !!

सींचा तूने अपने लहू की बूंद बूंद से
अपना सब कुछ था तुमने गवा दिया
मैं तो था नहीं किसी के शायद काबिल
तूने लगा कर सीने से अपना बना लिया !!

मेरे हर दर्द को अपना बना के माँ
अपने दुःख दर्द को था तुमने भुला दिया
जरा सी लगती थी चोट मेरे जिस्म पर
तेरे आंसुओं ने उस पर मरहम लगा दिया !!

जमाने का हर सबक बैठा के पास माँ
तुमने अपने इस लाल को सीखा दिया
कैसे भुला सकता हूँ तेरा वो उपकार माँ
दुनिया में मुझ को तुमने अनमोल बना दिया !!

कैसे चुकाऊंगा कर्ज तेरे दूध का माँ
मुझ में तूने अपना , कल बना लिया
दुआ करूँगा उस रब से हर जन्म
तेरी गर्भ में हो पैदा, क्यूं की तूने अपना लाल बना लिया !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

This is a competition entry.

Competition Name: "माँ" - काव्य प्रतियोगिता

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गायक और लेखक अजीत कुमार तलवार
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