माँ

(((((( माँ ))))))
________________________
जब बिन बोले माँ से,
कही देर तलक रह जाते है!
जब अपने मित्रो के संग कही,
मस्ती मे खो जाते है!
जब घर पहुचने को हमे,
जरा देरी से हो जाती है!
तब मेरी माँ मुझे देखने को,
घर की खिड़की पर आ जाती है!!
जब दूर-दूर न दिखने पर,
उनका दिल मचलता है!
मेरी चिंता मे माँ दिल,
ज़रा और तड़पने लगता है!
जब शोर-शराबे वाली गलिया,
उनको सुनी-सुनी सी लगती है!
तब माँ मुझे ढूंढने को,
पनघट तक आ जाती है!!
जब दूर कही से उनको मैं,
आता दिखाई देता हूँ!
पहले डॉट सुनाती है,
फिर समझती है!
इतने सारे गुस्से ने भी,
एक एहसास दिखाई देता है!
हर डॉट मे माँ के मेरे,
मुझको प्यार दिखाई देता है!!

( ज़ैद बलियावी)

Like 1 Comment 0
Views 242

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119