माँ, हर बचपन का भगवान

माँ, हर बचपन का भगवान |
सजग सुकोमल मनभावन ममता का अमल वितान |

जित देखो उत प्रेम-फुहारों से भरती सुत का दिल |
सदा सुहावन लोरी गाकर, बनी गुणी सह काबिल |
निद्रा की पुचकार -प्रदातारूपी बनी विधान |
माँ हर बचपन का भगवान |

शांति और अपनापन के आभारूपों का सावन |
माँ-अंदर देखा ममतामय ऊँचा दिल मनभावन |
सारी दुनिया से उत्तम माँ-आँचल का परिधान |
माँ, हर बचपन का भगवान |

पावन ज्ञान-ध्यान को तजकर बनी सदा वह मेरी |
तू-तू मैं-मैं के काँटों में प्रेम-बेर की ढेरी –
जैसी बनकर छाई दिल में, तज कर सकल गुमान |
माँ, हर बचपन का भगवान |
……………………………………………………..

पं बृजेश कुमार नायक
सुभाष नगर कोंच
केदारनाथ दूरवार स्कूल के पास
कोंच, जिला-जालौन, उ प्र ,पिन 285205

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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