मुक्तक · Reading time: 1 minute

माँ से ये कहकर निकले है

हम कफन ओढ घर से निकले हैं
जान हथेली में रखकर निकले है
दुश्मनों के मिटा देंगे वजूद हम
अपनी माँ से ये कहकर निकले है

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