मुक्तक · Reading time: 1 minute

माँ रो देती थी

मेरी मां दुनिया की सबसे अच्छी माँ है
मैं ये जब कहता था तो माँ रो देती थी
मैं अपनी नींद तक ढूंढ नही पाता खुद से
उंगलियों से मेरे बालों में माँ उसको ढूंढ देती थी
दूर जाता था तो माँ के आंसू देखे थे मैंने
घर मे आता था तो हँस के माँ रो देती थी
कभी चोट लगती थी मुझको बताता नही था मैं
देखकर मुझको न जाने क्यों माँ रो देती थी
जान नही पाया इतने आंसू कहाँ से लाती थी वो
मैं पूछता था माँ से तो माँ रो देती थी
आज जब बाप बना रो दिया मैं देखकर नन्ही जान को
अब मैं जानता हूं क्यों माँ रो देती थी

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मैं उत्तर प्रदेश का निवासी हु । मेरा प्रोफेशन इंजीनियरिंग है और उपक्रम कर्मचारी हु मगर मुझे कविताओं के पढ़ने का शौक है । कविता लेखन के साथ कहानी लिखना…
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