Jan 20, 2017 · कविता

माँ मैने क्या कसूर किया

माँ मैने क्या कसूर किया
जो तुने मुझे छोड दिया
एकांत में मरने के लिए
इस बीहड़ जंगल में डाल दिया
में तो चाहती थी इक कोना
तेरी ममतामयी गोद में सोना
पर विधाता ने नही लिखा
मेरे भाग्य में ऐसा होना
माँ मैने क्या कसूर किया
जो तुने मुझे छोड़ दिया।
क्या कसूर इतना किया
लड़की के रूप में जन्म लिया
पर माँ आपने भी तो कभी
लड़की के रूप में ही जन्म लिया
माँ मैने क्या कसूर किया
जो तूने मुझे छोड़ दिया।
माँ में कोई जिद न करती
तेरे साथ ही में काम करती
पर नही था भाग्य में मेरे
इस धरती पर रहना
माँ मैने क्या कसूर किया
जो तूने मुझे छोड़ दिया।
जन्म तूने मुझे दिया है माँ
फिर खुद से दूर क्यों किया है माँ
हु में तेरी राजदुलारी
तूने ही मुझे अपना अक्स दिया
माँ मैने क्या कसूर किया
जो तूने मुझे छोड़ दिया।
तेरे घर के ऊपर आसमान में
तारा इक बन जाउंगी माँ
तेरे आँगन को चमकाकर
अपनी यादे छोड़ जाउंगी माँ
माँ मेने क्या कसूर किया
जो तूने मुझे छोड़ दिया

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