माँ-ममता की निधि

“माँ” -ममता की निधि

कुछ आँसू ममता के होंते
कुछ खुशियो के ढ़र जाते है ।
कुछ तखलीफो के सागर में
मिलकर मोती बन जाते है ।

फिर भी लाती चुनकर ख़ुशियाँ
हर इक ताने बाने से ।
ममता की निधि देकरके वह
मर मिटती मुस्काने से ।

माँ के आँचल मे जन्नत है
आँचल की छाया मे प्यार ।
मिला जिसे वो धन्य हो गया
जड़ जङ्गम सारा संसार ।

चाहे माँ की वह लोरी हो
हो चाहे रूखा ब्यवहार ।
माँ से अलग नही हो सकता
माँ, माँ की ममता का प्यार ।

मौलिक एवं अप्रकाशित
रकमिश सुल्तानपुरी
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

Voting is over for this competition.

Votes received: 42

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 8 Comment 29
Views 213

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share