.
Skip to content

माँ मत ला आँखों में पानी

कुमार करन 'मस्ताना'

कुमार करन 'मस्ताना'

कविता

March 9, 2017

हे भारती!
क्यों होती है उदास
हम पूतों पर रख विश्वास
नहीं लुटेगा शीश का ताज़
बची रहेगी तेरी लाज
कर दूँगा न्योछावर तुझपे
अपना तन-मन और जवानी,
माँ! मत ला आँखों में पानी!!

है शोणितों में उबाल वही
जीवित हैं तेरे लाल अभी
हर पीड़ा झेलेंगे हँसकर
आँच न आने देंगे तुम पर
कोटि-कोटि पूर्वजों की
व्यर्थ नहीं होगी बलिदानी,
माँ! मत ला आँखों में पानी!!

जब तक होगा सांसों में दम
डटे रहेंगे हर पल हम
निःसंदेह तू दे आशीष
नहीं झुकेगा तेरा शीश
युगों-युगों तक रहेगा अंकित
हम लिखेंगे वह अमर कहानी,
माँ! मत ला आँखों में पानी!!

चहुँ ओर होगी खुशहाली
अमिट रहेगी यह हरियाली
सुख-समृद्धि का भंडार
सदैव रहेगा तेरे द्वार
तेरी कीर्ति से महकेगा जग
तू बनी रहेगी वसुधा की रानी,
माँ! मत ला आंखों में पानी!!

Author
कुमार करन 'मस्ताना'
(Poet/Lyricist/Writer) MEMBER OF :- (1) Film Writer's Association, Mumbai. (2) The Poetry Society of India.
Recommended Posts
*** हाँ पानी-पानी  ***
हाँ पानी - पानी इस जीवन की रवानी हाँ पानी-पानी बहता निर्मल जल हरपल पानी-पानी हाँ पानी - पानी कभी बरखाजल करता छल पानी-पानी कभी... Read more
माँ
???? हर मोहब्बत आँखों में पानी ला देती है, एक माँ की ममता होठ पर सदा मुस्कुराती है। ???? ???? जब भी माँ याद आती... Read more
हर त्यौहार हम सब अपनों के साथ मनाना चाहते हैं;जो बच्चे दूर हैं काम में संलग्न होने की वजह से नहीं आ पाते।माँ -बाप की... Read more
ओ माँ, ऐ माँ, ....................|गीत| “मनोज कुमार”
ओ माँ, ऐ माँ, मेरी माँ, ओ माँ मेरी किस्मत का खजाना तू ही तू ही माँ इन आँखों की खुशियाँ रहमत तू ही माँ... Read more