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माँ बाप और पैसा

Harsh Lahoti

Harsh Lahoti

कविता

May 17, 2017

मेरे बेटे तूने पैसा खूब कमाया पर
तेरा यह पैसा किसी काम नहीं आया

जो तू अपनी पालनहार को पाल नहीं पाया
अपने मां-बाप को तू आश्रम छोड़ आया

मैंने अपनी उदर में तुझे पनाह दी थी तू मुझे एक छत तक नसीब नहीं करा पाया

जिस पिता ने उंगली पकड़ तुझे चलना सिखाया
तू उसके बुढ़ापे की लाठी तक ना बन पाया

तेरी भूख पर अपना निवाला भूल कर मैंने तुझे खाना खिलाया
तु मुझे दो वक्त की रोटी तक ना नसीब करा पाया

तेरा शौक पूरा करने जिस पिता ने कर्ज लेकर तुझ पर लाखो खर्च किए तू उसके दवा का बिल भी चुकाना पाया

धूप में जिस आंचल की छाव ली थी तूने
उस आंचल से तूने उसका घर भी छुड़वाया

जिस पिता के कंधे पर तू ने दुनिया देखी थी
तू उसे दवाखाने तक मैं ले जाना पाया

तेरी हर चोट से निकले खून देख जीन के आंसू आ जाया करते थे
तूने उन्हें बुढ़ापे में खून के आंसू रुलाया

मेरे बेटे तूने पैसा खूब कमाया पर
तेरा यह पैसा किसी काम नहीं आया

✍? हर्ष लाहोटी (बस्तर) 9589333342

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Author
Harsh Lahoti

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