माँ-बापू की लाडली-"बेटियाँ"

माँ-बापू की लाडली-“बेटियाँ”
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१-बेटी आँगन-नूर है,सदा करो तुम मान।
ज़मीं नहीं दु:ख बाँटती,माँ-बापू की आन।।

२-बेटी माँ-प्रतिरूप है,लक्ष्मी घर की एक।
करके कन्यादान तुम,कर्म कीजिए नेक।।

३-संज्ञा बन हर क्षैत्र की,शक्ति दिखाई आज।
स्वर्ण-सिंहासन बैठ ज्यों,कमला-पहना ताज।।

४-बेटी कोयल-कूक है,लगे कर्ण-प्रिय गीत।
माँ-बापू की लाडली,सुख-दु:ख की है मीत।।

५-पालन-पोषण कीजिए,संस्कारी दे गान।
अंबर भरती देखिए,लड़कियों की उडा़न।।

६-दो बच्चे ही कीजिए,लड़का-लड़की एक।
लड़के के बस फेर में,लड़की नहीं अनेक।।

७-बेटी सबकी एक-सी,रखना सदैव लाज।
तेरी-मेरी छोडिए,समता रखो समाज।।

८-बेटी फलता पेड़ है,खु़शियों का आधार।
बाँटे भर-भर प्यार सब,निभा कई किरदार।।

९-सदैव स्वागत कीजिए,तुम डंके की चोट।
लड़का-लड़की एक हैं,कर मन में ना खोट।।

१०-पढा़ लिखाकर बेटियाँ,करो अदा तुम फ़र्ज़।
माँ-बापू किरदार है,करो सफलता दर्ज़।।

राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
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सर्वाधिकार सुरक्षित..radheys581@gmail.com

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