माँ-बापू का मान रखना हमेशा

पाला तुमको नाज़ से,खुशियाँ दी भरपूर।
धोखा उस माँ-बाप से,करना ना हो दूर।।

दिल के टुकड़े चाँद-से,आँखों का अरमान।
बातें इनकी मान के,देना सब सम्मान।
जिनके ही आशीष से,हो जाओ मशहूर।
धोखा उस माँ-बाप से,करना ना हो दूर।।

भागें घर से रूठ के,कर लव मैरिज़ भूल।
बेटा-बेटी तोड़ दें,पल में सारे रूल।
गलती ऐसी ना करो,हो मन चकनाचूर।
धोखा उस माँ-बाप से,करना ना हो दूर।।

पहले क़ाबिल तुम बनो,फिर शादी की बात।
अपनी पसंद से करो,प्यारी हो सौग़ात।
माँ-बापू ये मान लें,होता फिर न कसूर।
धोखा उस माँ-बाप से,करना ना हो दूर।।

माँ-बापू करते सदा,बच्चों का ही ख़्याल।
बच्चों से उनकी खुशी,समझो इनका हाल।
दुख देकर माँ-बाप को,सुख ना हाथ हुजूर।
धोखा उस माँ-बाप से,करना ना हो दूर।।

पाला तुमको नाज़ से,खुशियाँ दी भरपूर।
धोखा उस माँ-बाप से,करना ना हो दूर।।

आर.एस.प्रीतम
——————–
सर्वाधिकार सुरक्षित–radheys581@gmail.com

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 25

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share