माँ बहुत याद आओगी तुम

माँ बहुत याद आयोगी तुम

माँ मेरी तुझसे इस जगत में पहचान
माँ तू जिंदगी में तो ,है मेरी मुस्कान

मैंने माँ कहना ही सीखा बचपन में
माँ मैं तो हूँ तेरा ही,देखले प्रतिमान

माँ तू ही मेरे लिये ममतामयी दुर्गा
तू ही मेरी शक्ति ,कर मेरा उत्थान

कोटि कोटि नमन करूँ माँ तुझको
तू ही है वीणा वाहिनी ,दे मुझे ज्ञान

सार्थक हुआ मेरा जीवन तुझसे माँ
तूझसे ही सीखा वेद और कुरआन

माँ तू तुलसी की रामायण मेरे लिए
माँ तू ही मीरा ग़ालिब और रसखान

तू माँ अंधेरो में मुझे रोशनी देती हुई
तू ही मेरी लिए है वेदों का व्याख्यान

माँ तू ही मेरी पहली गुरु बचपन की
माँ तू ही मेरी आत्मा का है आख्यान

करता माँ तेरी मैं प्रशँसा जमाने मेँ
तू है माँ मेरी भारत माँ जैसी महान

तेरा माँ जगत में है रूप ही अनोखा
तू माँ जगत में है मेरा ही स्वाभिमान

माँ तू मेरी डूबती नैया को पार लगती
तेरे बिना मेरी दुनियां हुई है माँ वीरान

माँ वो तेरी सुरीली मीठी लोरी सुनी है
तू त्रिलोको में है ,माँ गुणों की खान

तू ही मेरी हिंदी तू ही मेरी गुजराती
तुझपे मेरी श्रद्धा तू है मेरा हिंदुस्तान

मुझ अनाथ से हमदर्दी किसी को
गले लगाके कर, माँ मेरा कल्याण

माँ तू बहुत याद आएगी मुझकों
मेरी पुकार से गूजेंगे सारा जहान

अशोक सपड़ा हमदर्द की क़लम से दिल्ली से

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