23.7k Members 49.8k Posts

माँ पर दोहे

माँ पर दोहे
सुशील शर्मा

जीवन तपती धूप है, तू शीतल सी धार।
थपकी लोरी में छुपा, माँ का अनगढ़ प्यार।।

तुझ से ही सांसे मिलीं, तुझ से जीवन गीत।
तुझ से ही रिश्ते जुड़े तू पावन सी प्रीति।।

तेरी लोरी में बसा, सुर संगम आभास।
तेरे क़दमों में बिछा हम सबका आकाश।।

सारा दुख तूने सहा, बीने सारे शूल।
अपने बच्चों के लिए, बिखराये तू फूल।।

माँ तुलसी का रोपना माँ शीतल जल धार।
माँ से बढ़ कर कौन है इतना दे जो प्यार।।

माँ का रिश्ता हर जनम, सब रिश्तों की शान।
बिन तेरे सब घर लगें, सूने से श्मशान।।

माँ ममता की महक है ,माँ है सूर्य प्रकाश।
माँ हरियाली सी लगे, माँ जीवन की आस।.

माँ के चरणों में बसे ,गीता और कुरान।
माँ की जो पूजन करे, उसे मिलें भगवान।।

मैं अनगढ़ मूरत भला, मुझे कहाँ है भान।
संस्कार माँ से मिले, बना दिया विद्वान।।

माँ है सरिता नेह की, त्याग समर्पण नाम।
माता के आशीष से, बनते बिगड़े काम।।

This is a competition entry.

Competition Name: "माँ" - काव्य प्रतियोगिता

Voting for this competition is over.

Votes received: 21

Like 7 Comment 19
Views 150

You must be logged in to post comments.

LoginCreate Account

Loading comments
sushil sharma
sushil sharma
10 Posts · 550 Views
सुशील कुमार शर्मा S/o श्री अन्नीलाल शर्मा ज्ञानदेवी शर्मा शिक्षा-M Tech(Geology)MA(English) पारिवारिक परिचय पत्नी-डॉ अर्चना...