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माँ नारी का सर्वोत्तम स्वरूप

माँ ! प्रभु की ऐसी होती है सौगात ,
जिसमें होती अनोखी बात ।
माँ का स्पर्श, तत्काल पहुँचाता आराम
सारी कठिनाइयों को बनाता आसान।

माँ की बातें.. हृदय में जगाती आत्मविश्वास,
जग में हमें बनाती ख़ास ।
हमें सुलाने को वह रातभर जागती ,
पालने को महत्त्वकांक्षाओं से किनारा करती।

कठिनाइयों की धूप में बनती छाया ,
हमारे लिए ही वह गलाती काया ।
माँ की इतनी पहचान ,
वह है गुणों की खान ।

संतान के दुःख-सुख का चिन्तन ,
यही उसके जीवन का आधार ।
बचपन से वृद्ध होने तक ..
माँ का प्रेम एक सार ।

निःस्पृह, निर्लोभी व निर्विकार ,
बच्चे के स्वप्न को करती साकार ।
माँ का हम कभी भी …
चुका न पाएँगे आभार ।

-(स्वरचित)डॉ. उपासना पाण्डेय
भिवाड़ी , राजस्थान😊

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Competition Name: "माँ" - काव्य प्रतियोगिता

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Dr. Upasana Pandey
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