" माँ नर्मदा के किनारे "

” माँ नर्मदा के किनारे “

आज अपने घर और शहर के कोलाहल से दूर जीवनदायिनी माँ नर्मदा के किनारे प्रकृति की गोद में आज इस साल की पहली बारिश का अनुभव कर रहा हूँ । एक ओर नदी का किनारा है वहीं दूसरी ओर गरजते हुए बादल जहाँ एक ओर नदी की लहराती हुई जलधारा है वहीं दूसरी ओर मचलती हुई हवाओं का झोंके । एक बहुत अद्भुत संगम दिखाई दे रहा है ।
यहाँ से दूर उस नीले पर्वत पर छाई हुई काली घटाएँ और उस पर्वत के आगोश से निकल कर आने वाली ठंडी हवाए । यह सब मिलकर आस-पास के पूरे वातावरण को एक अद्भुत आकर्षण का केंद्र बना दे रहे है। इसी संगम में सम्मिलित हो जाती है यह बारिश की बूंदे जो कभी तो सीधे धरती पर आकर गिरती हैं और कभी हवा के साथ-साथ अपने रुख को भी मोड़ लेती है
नदी के किनारे पर बैठकर यह सब देखना एक बेहद रोमांचक और मनोहारी है एक ओर जब हम शहर में बारिशों से बचते हैं उन से दूर भागते हैं आज शहर के कोलाहल और तनाव से दूर यहाँ एकांत में एक नदी के किनारे पर बैठकर इस तरह बारिश की बूंदों से भीगना और इस मनोरम दृश्य को देखना ऐसा लगता है जैसे जीवन का सबसे अद्भुत दृश्य जीवन का सबसे सुकून दने वाले पल यदि कहीं हैं तो यहीं पर है।
शहर में जो बारिश और हवाएं आफत नजर आती हैं आज वही सुख प्रदान करने वाली नजर आ रही है दोस्तों बारिश में कोई फर्क नहीं है फर्क हमारी मानसिकता में है। शहर की तनाव भरी जिंदगी और शोर-शराबे में हम इतना ज्यादा परेशान रहते हैं कि हम इन छोटे-छोटे सुखों को भी नजरअंदाज कर देते हैं ।
आज यहाँ इस शांत वातावरण में बैठ कर लगता है कि कभी-कभी शहर के कोतूहल और कोलाहल से दूर शांत और एकांत में आकर हम ऐसा बहुत कुछ पा जाते हैं जो हमें शहर की चकाचौंध नहीं दे सकती।
जीवन का वह छोटा सा असीम सुख जो इस स्थान पर मुझे मिला शायद यह इन शब्दों से प्रतीत नहीं होता किंतु हाँ यह एक बेहद अद्भुत, बेहद अनोखा और बेहद मनोहारी समय था । यह एक ऐसा समय एक ऐसा स्थान था जहाँ प्रकृति क्या है और प्राकृतिक सौंदर्य क्या है इसकी एक झलक मुझे देखने को मिली।
!! धन्यवाद !!

भवानी प्रताप सिंह ठाकुर
संपर्क – 8989100111
ईमेल – thakurbhawani66@gmail.com

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