Skip to content

माँ देती दुआएं हैं

arti lohani

arti lohani

गज़ल/गीतिका

October 7, 2017

ग़ज़ल —-

सुहाना है ये मौसम हर तरफ फैली लताएं हैं।
ये बेलें हैं,घनी जुल्फें या बस तेरी अदायें हैं।

कभी आकर यूँ ही जो लिक्खे थे किस्से मुहब्बत के।
कभी खुद हम ही पढ़ते हैं कभी सबको सुनाये हैं।।

सिसकता छोड़ के तनहा जो इक दिन बढ़ गए आगे।
उसी इक मोड़ पर अब भी सुनी जाती सदाएं हैं।।

हमारी खत्म होती उर्वरा के हम ही कातिल हैं।
मगर चुपचाप रहकर भी धरा देती सजाएँ हैं।।

खफ़ा होती नहीं माँ चाहे कितना भी सता लें हम।
भुलाकर सारे अश्कों को वो बस देती दुआएं हैं।

आरती लोहनी

Share this:
Author
arti lohani

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you