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माँ दुर्गा के दोहे

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

दोहे

September 21, 2017

माँ दुर्गा के दोहे
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रक्तिम साड़ी तन सजे,गुड़हल हार सुहाय।
मस्तक मुकुट बिराजता, शोभा भक्त लुभाय।।

सवा रुपैया नारियल, रोली अक्षत हाथ।
हलुआ पूड़ी भोग ले, माँ को पूजें साथ।।

अंबे सिंह पर राजति,दुर्गा काली रूप।
उनको आदर भाव से पूजें नर अरु भूप।।

माँ की महिमा है भली, हरती दुख संताप।
भक्तों की मुश्किल टरे, स्वयं काटती पाप।।

माँ दुर्गा सुखदायिनी ,जग की पालनहार।
पूजो माँ को नौ दिवस, कर देगी उद्धार।।

देवी पूजा अर्चना, नमन करूँ धर ध्यान।
बिन माँगे मोती मिले, दुख का करे निदान।।

माँ का सुमिरन जो करे,भक्ति भाव गुणगान।
भवसागर से तारती, मैया दे वरदान।।

माता को नित पूजके,कर्म करे जो नेक।
जीवन में सुख भोगता,पाकर बुद्धि विवेक।।

डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”
संपादिका-साहित्य धरोहर
महमूरगंज, वाराणसी

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Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more
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