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माँ तेरे प्रेम की मुझको धारा मिले

Nitin Sharma

Nitin Sharma

गज़ल/गीतिका

November 6, 2016

माँ तेरे प्रेम की मुझको धारा मिले
फिर मेरी जिंदगी को किनारा मिले १

जिंदगी भी मुझे दर्द देती रही
माँ तेरी गोद का अब सहारा मिले २

अब मुझे याद आता है बचपन मेरा
काश बचपन मुझे अब दुबारा मिले ३

फ़िक्र मुझको नही है जमाने की अब
माँ मुझे प्रेम बस एक तुम्हारा मिले ४

तीर्थ है सारे चरणों में माँ बाप के
इस जहाँ में न ऐसा शिवाला मिले ५

चाह मुझ को नही चाँद तारों की अब
टूटता ही सही एक तारा मिले ६

तीरगी से बहुत लड़ लिए ये ख़ुदा
अब अँधेरे सफ़र में उजाला मिले ७

प्यार से अब मुझे पास अपने बिठा
बस तेरे हाथ से एक निवाला मिले ८

जन्म मुझको मिले बस तेरी गोद में
प्यार तुमसे मुझे ढ़ेर सारा मिले ९

गोद तेरी मिले हर जनम में मुझे
गोद में जन्म मुझको दुबारा मिले १०

जिंदगानी फ़कत चार दिन की नितिन
मंजिले दूर है एक ठिकाना मिले ११

Author
Nitin Sharma
नितिन शर्मा , इटावा कोटा ( राजस्थान ) - ग़ज़ल /मुक्तक लेखन मोबाइल - 9784824274
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