Skip to content

माँ तेरे दर पर आई हूँ।

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

कविता

February 14, 2017

जय माँ वैष्णो देवी
जय माता दी
जय माँ शेरावाली
?????
माँ तेरे दर पर आई हूँ
हाथ जोड़े मैया ,
श्रद्धा का पुष्प मैं लाई हूँ

क्या माँगूं माँ मैं तुझ से
बहुत कुछ कमी हैं मुझ में,
क्या छुपा है तुझ से
सब जानती है ,मैया
जो कुछ भी है मेरे मन में
तेरे चरण में मैया
सर को झुकाने आई हूँ

माँ तेरे दर पर आई हूँ
हाथ जोड़े मैया,
श्रद्धा का पुष्प मैं लाई हूँ

एक तेरा सहारा माँ
एक तेरा भरोसा माँ
जो मझधार मेरी नैया
माँ तू ही है खेवैया
अपने जीवन की नैया
तेरे हवाले करने आई हूँ

माँ तेरे दर पर आई हूँ
हाथ जोड़े मैया ,
श्रद्धा का पुष्प मैं लाई हूँ
?????—लक्ष्मी सिंह

Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
Recommended Posts
जय माँ अम्बे
जय माँ अम्बे ???? ये मेरा भाग्य है मैया जो मैं तेरे दर पे आई मैं तर गई मैया जो तुने हृदय लगाई ये तन... Read more
बहुत रोयेंगे माँ
बहुत रोयेंगे माँ हम तुम्हे याद करके, तेरा ही आँचल ढूँढेंगे दुःख में याद करके, जीवन में करेंगे भी क्या माँ तेरे बिन हम, जिन्दगी... Read more
माँ तुम हो तो ही मैं हुँ।।
माँ तेरे होने से ही मैं हूँ।। जो तू है तो मैं हूँ।। मुझे रोते से वो तेरा हँसाना।। मेरे रूठना और वो तुम्हारा मनाना।।... Read more
माँ
माँ माँ…............. माँ मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ इस जन्म क्या हर जन्म तेरा बेटा होने की मैं ख़ुदा से फरियाद करता हूँ। माँ... Read more