Nov 29, 2018 · कविता
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माँ – तेरी सूरत मैं

माँ तेरी सूरत मैं भूल नहीं पाऊँगी
तेरी ममता को अब फिर नहीं पाऊँगी
भुलाये से नहीं भूलती हूँ मैं तेरी मूरत
निगाहों में बस गई अब तेरी ही सूरत
याद करती हूँ तो सुकून पा लेती हूँ
ज़िन्दगी में बहुत पल ऐसे गुजार लेती हूँ
मैं आज जो हूँ, जैसी भी हूँ, बस उनकी बदौलत
माँ के प्यार और आशीर्वाद से बढ़कर नहीं कोई दौलत
परिवार में उनके जैसा कोई नहीं था
और लगता है आगे भी कोई नहीं होगा
वो ममता की सूरत थी, प्यार की मूरत थी
परिवार सदा बंधकर रहा ये उनकी ही खूबी थी
आकाश में ना जाने किन सितारों में नज़र आएंगी
माँ हमको तेरी याद आती है और सदा आएगी
कमी तेरी कोई पूरी कभी कर नहीं सकता
चाहे ममता का आँचल फैला दे कोई भी
पर ये मन उसे “माँ” कह नहीं सकता
बस गुजारिश है ऊपरवाले से
उनका आशीर्वाद सदा मेरे परिवार पे रहे |

!!! मधुप्रमोद !!!

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Madhu Kirori
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