Nov 14, 2018 · कविता
Reading time: 1 minute

माँ तेरा है रूप महान

माँ,माँ यह शब्द तो
मानो इक वरदान है।
माँ बिन सृष्टि कहाँँ चलती है?
प्रकाश है त्रिलोक में
विधि का विधान है।
माँ बिन श्वास कहाँ चलती है?
संस्कृति व सभ्यता की
माँ ही इक पहचान है।
माँ बिन सिद्धि कहाँ मिलती है?
गीता , रामायण, गुरुबानी
बाइबिल और कुरान है।
माँ बिन ममता कहाँ मिलती है?
माँ की शक्ति को निरख परख
विद्वान भी हारे हैं।
ऋषि ,मुनि, देव ,योगी
चरणों में झुके भगवान हैँ
माँ तेरी मेरी नहीं हमारी होती है।
कुदरत की अनमोल कृति
माँ का रूप महान है।

मोनिका कपूर।
आई.टी.एल.पब्लिक स्कूल
द्ववारका दिल्ली।

.

Votes received: 107
7 Likes · 30 Comments · 794 Views
Copy link to share
Monika Kapoor
1 Post · 794 Views
You may also like: