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माँ तेरा है रूप महान

माँ,माँ यह शब्द तो
मानो इक वरदान है।
माँ बिन सृष्टि कहाँँ चलती है?
प्रकाश है त्रिलोक में
विधि का विधान है।
माँ बिन श्वास कहाँ चलती है?
संस्कृति व सभ्यता की
माँ ही इक पहचान है।
माँ बिन सिद्धि कहाँ मिलती है?
गीता , रामायण, गुरुबानी
बाइबिल और कुरान है।
माँ बिन ममता कहाँ मिलती है?
माँ की शक्ति को निरख परख
विद्वान भी हारे हैं।
ऋषि ,मुनि, देव ,योगी
चरणों में झुके भगवान हैँ
माँ तेरी मेरी नहीं हमारी होती है।
कुदरत की अनमोल कृति
माँ का रूप महान है।

मोनिका कपूर।
आई.टी.एल.पब्लिक स्कूल
द्ववारका दिल्ली।

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This is a competition entry.

Competition Name: "माँ" - काव्य प्रतियोगिता

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Monika Kapoor
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