मुक्तक · Reading time: 1 minute

माँ तुम ही हो

खड़ा हूँ मैं बुलंदी पर, मगर आधार तुम ही हो
सुनो माँ मेरे जीवन का ,तो पूरा सार तुम ही हो
ख़ुशी में मेरी हँसती हो ग़मों में मेरे रोती तुम
मेरा भगवान तुम ही हो , मेरा संसार तुम ही हो

डॉ अर्चना गुप्ता

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