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माँ मेरी मंदिर भी मस्जिद, माँ ही गिरजाघर लगे……माँ के कदमों में मेरे तो देख चारों धाम है

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

गज़ल/गीतिका

July 27, 2017

अब नहीं मुझको पता दिन है भला या शाम है
आदमी देखो यहाँ हर दूसरा गुमनाम है

काम जो करता रहा उस पर उठी ये उंगलियाँ
जो कसीदे झूठ के पढ़ता उसी का नाम है

आजकल बस झूठ के चलने लगे हैं दौर यूँ
राह सच्ची जो चला वो आदमी बदनाम है

बेवजह हर आदमी अब बैर है रखने लगा
हर तरफ देखो यहाँ क्यूँ कर मचा कुहराम है

देख दिन फिर एक बीता जागती इक रात है
चाँद बनकर डाकिया लाता नहीं पैगाम है

माँ मेरी मंदिर भी मस्जिद, माँ ही गिरजाघर लगे
माँ के कदमों में मेरे तो देख चारों धाम है

लोधी डॉ. आशा ‘अदिति’
बैतूल

Author
लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
मध्यप्रदेश में सहायक संचालक...आई आई टी रुड़की से पी एच डी...अपने आसपास जो देखती हूँ, जो महसूस करती हूँ उसे कलम के द्वारा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ...पूर्व में 'अदिति कैलाश' उपनाम से भी विचारों की अभिव्यक्ति....
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