माँ की ममता

माँ की ममता के सिवा, नही हमारा कोई दूजा !
नही कर्ज चूक सकता ,चाहे करे हम उसकी पूजा !!
विकट हालातो में भी, देती नही कभी बद्दुआ।
जो हो न सका माँ का,किसी का भी ना हुआ ।।
माँ दुनिया का है सबसे प्यारा रिश्ता ।
बिन माँ के दुनिया में ना ईश्वर ना फरिश्ता ।।
खुद भूखी रह खिलाती हमें पकवान ।
सपनो में भी हमारी ही खुशियों के अरमान ।।
खुद की नींद त्यागकर लोरी गाती सुनाती हमें ।
गलतियों पर प्यार से डांटती फटकारती हमें ।।
सांवले होने के बाद भी दुनिया की बुरी नजरो
से बचाने काला टीका लगाती हमें ।।
गीले में सो सूखे में सुलाती हमें ।
होतो ज्वर तो चूल्हे का ताप बताती हमें ।।
बच्चो को खिलाकर बाद में है खुद खाती
बच्चों के खातिर भगवान से भी लड़ जाती

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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