Nov 6, 2018 · घनाक्षरी
Reading time: 1 minute

माँ की दुआ [घनाक्षरी छंद ]

कृषक हरष जात खेत लहरातें देख ,
माँ हरष जात अपने पूत को निहार के ।

चातक हरष जात मिले जब स्वाति बूंद ,
माँ हरष जात निज पूत को जिवाय के ।

पिता हरष जात तनय सफलता देख ,
माँ हरष जात दुल्हन देहरी लाय के ।

कहत सकल देव माँ सा न दूजा देख ,
मेरा ह्रदय हरषे माँ की दुआ पाय के ।
———————————————————

माँ की सीख से मानव पंडित प्रवीन होत ,
माँ की सीख से मानव कायर कपूत हैं ।

माँ की सीख से मानव बली और अली होत,
माँ की सीख से बनते राम व रहीम है ।

माँ की सीख से व्यापत नाहि जगत व्यसन,
माँ की सीख से बनते हीरा कोहिनूर है ।

कहत जगदाता जहाँ माँ से बड़ा न होत,
माँ की महिमा गाते पुराण व कुरान है ।

शेख जाफर खान

Votes received: 34
11 Likes · 34 Comments · 285 Views
शिक्षक शासकीय माध्यमिक शाला- मिढ़वानी तहसील -गाडरवारा जिला -नरसिंहपुर मध्य प्रदेश Awards: "आचार्य सम्मान "मध्यप्रदेश... View full profile
You may also like: