Nov 30, 2018 · कविता
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माँ की खुशियाँ इतनी महँगी क्यों

जिस माँ के दामन से
सबकी झोलियां भरे
कोई याचना न खाली जाए
उस, माँ की झोली खाली क्यों
सदाचार का बीज जो
शिशु के मन में रोपित करती
प्रथम गुरु जो कहलाती है
उस,माँ के नाम की गाली क्यों
संतति की हर छोटी खुशी के लिए
अपने शरीर की सुध -बुध खोकर
काम में तल्लीन जो रहती है
उस,माँ की खुशियाँ इतनी महँगी क्यों
अपने लिए न जीवन एक पल जीती है
बच्चों के लिए ही बस मर मिटती है
परिवार का सबसे मजबूत पहिया जो है
उस,माँ के सपने सच होते न क्यों
बार बार बस एक ही चीज को
पूछ पूछ कर ता उम्र थकाते रहते हम
उम्र के आखिरी पड़ाव में
उस, माँ को सुनने को कोई तैयार नहीं है क्यों

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Kusum Meena
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