माँ की उपेक्षा क्यों करें

माँ एक ऐसी है जो पूरी संसार में न तो खरीदा जा सकता और न ही कहीं मिल सकती है। माँ एक अनमोल चीज़ है। और हर बच्चों की खुशियाँ के लिए माँ अपनी जान भी देने के लिए तैयार हो जाती है लेकिन ईश्वर ने हम सभी माँ दिया है। इस संसार में माँ की दर्जा क्या है हर कोई नहीं जानता है। जब माँ अपनी पेट में नौ माह अपनी पेट में रखती है। और फिर उसके बाद जन्म देती है। सबसे पहले गुरु माँ ही होती है जो हमें सही राह पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। और हर छोटी बड़ी जरुरतों का ध्यान रखने वाली और खूबसूरत इंसान है। वो बिना अपनी व्यक्तिगत लाभ के हमारी हर जरुरत के लिए वो हमेशा ध्यान रखती है। लेकिन आजकल जिस तरह देखने और सुनने को मिल रहा है कि माँ की अहमियत कोई नहीं देता है और व्यक्ति वो पल जरा सा भी याद नहीं करता है कि माँ किस तरह पालन पोषण की थी। जो खुद को भूखे रहकर हमें खाना खिलाती थी। और वो लम्हा जब माँ बिस्तर पर कहानी सुनाकर सुलाती थी और सुबह के समय बहुत प्यार से हमें बिस्तर से उठाती है। और नाश्ता बनाकर खिलाती थी फिर उसके बाद स्कूल जाने के लिए तैयार करती थी। जब हम बड़ा हुए, इस दुनिया के उलझन में हमसब माँ को भूला बैठे। और शादी होने के बाद तो माँ को घर से निकाल देता है और अपनी पत्नी के साथ जिंदगी व्यतीत करने लगता है। हालांकि ये सब नहीं होना चाहिए। माँ स्वर्ग में जानें का सहारा है और स्वर्ग ऐसे ही नहीं मिल सकता। जब माँ की कदर और सम्मान होगी। तभी हमसब स्वर्ग में जा सकते हैं। और हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी के साथ-साथ माँ बाप को कदर करना सीखें।

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